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jagjit singh - baat niklegi to phir door talak كلمات أغنية

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[intro]
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बे_वजह उदासी का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशान क्यों हो?

[verse 1]
उँगलियाँ उठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ़
इक नज़र देखेंगें गुज़रे हुए सालों की तरफ़
चूड़ियों पर भी कई तंज़ किए जाएँगे
काँपते हाथों पे भी फ़िक़रे कसे जाएँगे

[verse 2]
लोग ज़ालिम हैं, हर इक बात का ताना देंगे
बातों_बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
बातों_बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
उनकी बातों का ज़रा_सा भी असर मत लेना
वरना चेहरे के तअस्सुर से समझ जाएँगे

[verse 3]
चाहे कुछ भी हो, सवालात ना करना उनसे
चाहे कुछ भी हो, सवालात ना करना उनसे
मेरे बारे में कोई बात ना करना उनसे

[outro]
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी

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